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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 11
वासन्तशारदैमेध्यर्मुन्यन्नैः स्वयमाहृतैः । पुरोडाशांश्चरूश्चैव विधिवन्निर्वपेत्पृथक्‌ ।।
वसन्त तथा शरद्‌ ऋतु में पैदा हुए एवं स्वयं लाये गये पवित्र मुन्यन्नों से पुरोडाश तथा चरु को शास्त्रानुसार (उक्त कार्य की सिद्धि के लिए) अलग-अलग तैयार करे।
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