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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 1
एवं गृहाश्रमे स्थित्वा विधिवत्स्नातको द्विजः । वने वसेत्तु नियतो यथावद्विजितेन्द्रियः ।।
ब्रह्मचर्याश्रम के बाद समावर्तन संस्कार को प्राप्त स्नातक द्विज इस प्रकार (पञ्चमाध्यायोक्त) विधिपूर्वक गृहस्थाश्रम में रहकर आगे (इसी षष्ठ अध्याय में कथित) नियम से जितेन्द्रिय होकर वन में निवास करे।
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