युद्ध में क्षत्रिय-धर्म से (तलवार आदि के प्रहार से, लाठी या पत्थर आदि से नहीं) मारे गये व्यक्ति का ज्योतिष्टोमादि यज्ञ तत्काल ही पूर्ण (ज्योतिष्टोमादि का फल प्रप्त) होता है और अशौच भी तत्काल नष्ट होता है, ऐसी शास्त्र की मर्यादा है।
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