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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 96
लोकेशाधिष्ठितो राजा नास्याशौचं विधीयते । शौचाशौचं हि मर्त्यानां लोकेभ्यः प्रभवाप्ययौ ।।
(अतएव) राजा लोकपालों के अंश से अधिष्ठित है, इस कारण इस (राजा) को अशौच नहीं होता है; क्योंकि मनुष्यों की शुद्धि या अशुद्धि लोकपोलों से होती है या नष्ट (दूर) होती है । (अतएव दूसरों की शुद्धि और अशुद्धि के उत्पादक और विनाशक लोकपालों के अंशभूत राजा की अशुद्धि कैसे हो सकती है?)।
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