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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 94
डिम्बाहवहतानां च विद्युता पार्थिवेन च । गोब्राह्मणस्य चैवार्थे यस्य चेच्छति पार्थिवः ।।
नृप से रहित युद्ध में मारे गये, बिजली से मरे हुए, राजा (किसी अपराध में राजदण्ड) से मारे गये अर्थात्‌ प्राणदण्ड प्राप्त, गौ. तथा ब्राह्मण की रक्षा के लिए (युद्ध के बिना भी जल, अग्नि या व्याघ्र आदि से) मारे गये और (अपनी कार्य हानि नहीं होने के लिए) राजा जिसकी तत्काल शुद्धि चाहता हो, उसकी (तत्काल शुद्धि हो जाती है)।
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