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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 91
दक्षिणेन मृतं शूद्रं पुरद्वारेण निर्हरेत्‌ । पश्चिमोत्तरपूर्वस्तु यथायोगं द्विजन्मनः ।।
मरे हुए शूद्र को नगर के दक्षिण द्वार से बाहर निकाले और अन्य द्विजों (वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण) के शव को क्रमशः नगर के पश्चिम, उत्तर तथा पूर्व के द्वार से बाहर निकाले अर्थात्‌ मृत ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य और शूद्र के शव को क्रमश: नगर के पूर्व, उत्तर, पश्चिम तथा दक्षिण दिशा के द्वारों से बाहर निकालना ना चाहिए।
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