आरण्यानां च सर्वेषां मृगाणां माहिषं विना ।
स्त्रीक्षीर चैव वर्ज्यानि सर्वशुक्तानि चैव हि ।।
भैंस को छोड़कर जंगली पशु (नीलगाय, हरिण आदि) तथा स्त्री का दूध और सब प्रकार के शुक्त (कांजी या सिर्का आदि - जो अधिक समय तक रखने आदि के कारण से स्वभावतः मधुर होते हुए भी खट्टे हो गये हों, उन्हें) छोड़ दें।
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