मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 9
आरण्यानां च सर्वेषां मृगाणां माहिषं विना । स्त्रीक्षीर चैव वर्ज्यानि सर्वशुक्तानि चैव हि ।।
भैंस को छोड़कर जंगली पशु (नीलगाय, हरिण आदि) तथा स्त्री का दूध और सब प्रकार के शुक्त (कांजी या सिर्का आदि - जो अधिक समय तक रखने आदि के कारण से स्वभावतः मधुर होते हुए भी खट्टे हो गये हों, उन्हें) छोड़ दें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें