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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 85
आचम्य प्रयतो नित्यं जपेदशुचिदर्शने । सौरान्मन्त्रान्यथोत्साहं पावमानीश्च शक्तितः ।।
श्राद्ध या देव-पूजन करने का इच्छुक व्यक्ति स्नानादि से शुद्ध होकर चाण्डाल आदि अशुद्ध व्यक्तियों को देखने पर उत्साहानुसार सूर्यमन्त्र का: तथा यथाशक्य “पावमानी” मन्त्र का जप करे।
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