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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 81
प्रेते राजनि सज्योतिर्यस्य स्याद्विषये स्थितः । अश्रोत्रिये त्वहः कृत्स्नमनूचाने तथा गुरौ ।।
जिसके देश में रहता हो, उस अभिषिक्त राजा के दिन में मरने पर सायं (सूर्यास्त) काल तक और रात में मरने पर प्रातःकाल (ताराओं के रहने का समय) तक अशौच होता है । घर में रहने वाले अश्रोत्रिय (श्रोत्रिय के लिये तीन रात पहले (५।८१) कह चुके हैं), अनूवान (अड्डों के सहित वेद पढ़ने वाला) और गुरु (२।१४९, १४२ भी) के दिन में मरने पर केवल सायंकाल तक और रात में मरने पर प्रातःकाल तक अशौच रहता है।
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