जिसके देश में रहता हो, उस अभिषिक्त राजा के दिन में मरने पर सायं (सूर्यास्त) काल तक और रात में मरने पर प्रातःकाल (ताराओं के रहने का समय) तक अशौच होता है । घर में रहने वाले अश्रोत्रिय (श्रोत्रिय के लिये तीन रात पहले (५।८१) कह चुके हैं), अनूवान (अड्डों के सहित वेद पढ़ने वाला) और गुरु (२।१४९, १४२ भी) के दिन में मरने पर केवल सायंकाल तक और रात में मरने पर प्रातःकाल तक अशौच रहता है।
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