श्रोत्रिये तूपसम्पन्ने त्रिरात्रमशुचिर्भवेत् ।
मातुले पक्षिणीं रात्रिं शिष्यर्त्विग्बान्धवेषु च ।।
श्रोत्रिय (अपने गृह में रहने वाला मित्रभावापन्न वेदपाठी), के मरने पर तीन रात तथा मामा, शिष्य, ऋत्विक् (२।१४३) और बान्धव के मरने पर पक्षिणी रात्रि (वर्तमान दिन तथा अगले दिन सायंकाल तक) अशौच होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।