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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 8
अनिर्दशाया गोः क्षीरमोौष्ट्मैकशफं तथा । आविकं सन्धिनीक्षीरं विवत्सायाश्च गोः पयः ।।
व्याने (प्रसव करने) के दिन से जिसको १० दिन न बीते हों ऐसी गाय (भैंस, बकरी आदि भी), ऊंटिनी, एक खुरवाली (घोड़ी गधी, आदि) पशु, भेड़, गर्भवती होने की इच्छा करने वाली (उठी हुई - गरमाई हुई) पशु, जिसका बच्चा मर गया हो ऐसी गाय; इनके दूध को (छोड़ दे- न पीवे)।
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