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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 78
अन्तर्दशाहे चेत्स्यातां पुनर्मरणजन्मनी । तावत्स्यादशुचिर्विप्रो यावत्तत्स्यादनिर्दशम्‌ ।।
पूर्वागत अशौच या सूतक के दस दिन बीतने के पहले ही फिर किसी का मरण या जन्म होने पर तब पहले अशौच तथा सूतक के दस दिन पूरा होने से ही ब्राह्मण (द्विज) शुद्ध हो जाता है । (पहले अशौच तथा सूतक में ही दूसरे अशौच या सूतक का अन्तर्भाव हो जाता है)।
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