बाले देशान्तरस्थे च पृथकपिण्डे च संस्थिते ।
सवासा जलमाप्लुत्य सद्य एव विशुध्यति ।।
बालक (बिना दांत उत्पन्न हुए) तथा समानोदक (सपिण्ड नहीं-५।६०) बान्धव के मरने पर मनुष्य वस्त्र के साथ स्नान कर तत्काल शुद्ध हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।