निर्दशं ज्ञातिमरणं श्रुत्वा पुत्रस्य जन्म च ।
सवासा जलमाप्लुत्य शुद्धो भवति मानवः ।।
दस दिन बीतने पर सपिण्ड बान्धव का मरण या पुत्र का जन्म सुनकर वस्रसहित स्नान करके मनुष्य शुद्ध (स्पर्श के योग्य) हो जाता है।
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