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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 75
अतिक्रान्ते दशाहे च त्रिरात्रमशुचिर्भवेत्‌ । संवत्सरे व्यतीते तु स्पृष्ट्वैवापो विशुद्ध्यति ।।
विदेश में मृत बान्धव का समाचार मरने के दस दिन बाद सुनकर सपिण्ड तीन दिन में शुद्ध होता है तथा एक वर्ष बीतने पर उक्त समाचार सुनकर केवल स्नान करने से सपिण्ड शुद्ध (अशौच से रहित) हो जाता है।
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