मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 73
सन्निधावेष वै कल्पः शावाशौचस्य कीर्तितः । असन्निधावयं ज्ञेयो विधिः सम्बन्धिबान्धवैः ।।
(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि--) पास में मरने पर यह अशौच की विधि मैने कही है, अब पास में न मरने पर अर्थात्‌ परदेश या परोक्ष में- जहाँ कोई अपना बान्धव नहीं हो वहाँ मरने पर आगे कही हुई विधि सम्बन्धियों (सपिण्ड तथा समान उदक वाले बन्धुओं) को जाननी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें