(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि--) पास में मरने पर यह अशौच की विधि मैने कही है, अब पास में न मरने पर अर्थात् परदेश या परोक्ष में- जहाँ कोई अपना बान्धव नहीं हो वहाँ मरने पर आगे कही हुई विधि सम्बन्धियों (सपिण्ड तथा समान उदक वाले बन्धुओं) को जाननी चाहिये।
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