पहले दूसरे की रहकर बाद में जो अपनी स्त्री हुई हो, ऐसी स्त्री में उत्पन्न पुत्र के जननाशौच और मरणाशौच मातामह (नाना) को तीन दिन और सपिण्डन को एक दिन होता है।
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