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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 71
स्त्रीणामसंस्कृतानां तु त्र्यहाच्छुद्धयन्ति बान्धवाः । यथोक्तेनैव कल्पेन शुद्धयन्ति तु सनाभयः ।।
पहले दूसरे की रहकर बाद में जो अपनी स्त्री हुई हो, ऐसी स्त्री में उत्पन्न पुत्र के जननाशौच और मरणाशौच मातामह (नाना) को तीन दिन और सपिण्डन को एक दिन होता है।
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