सहपाठी (एक गुरु के साथ पढ़े हुए) ब्रह्मचारी के मरने पर एक दिनरात अशौच होता है और समानोदक (५।६०) के यहाँ सन्तानोत्पत्ति होने पर तीन रात (दिन-रात) में शुद्धि होती है।
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