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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 70
सब्रह्मचारिण्येकाहमतीते क्षपणं स्मृतम्‌ । जन्मन्येकोदकानां तु त्रिरात्राच्छुद्धिरिष्यते ॥
सहपाठी (एक गुरु के साथ पढ़े हुए) ब्रह्मचारी के मरने पर एक दिनरात अशौच होता है और समानोदक (५।६०) के यहाँ सन्तानोत्पत्ति होने पर तीन रात (दिन-रात) में शुद्धि होती है।
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