नास्य कार्योऽप्रिसंस्कारो न च कार्योदकक्रिया ।
अरण्ये काष्ठवत्त्यक्त्वा क्षपेत त्र्यहमेव तु ।।
इस (दो वर्ष से कम आयु वाले बालक) का अग्निसंस्कार (दाहकर्म) तथा उदकक्रिया (तिलाञ्जलि देना) न करे किन्तु उसे जंगल में काष्ठ के समान छोड़कर तीन दिन अशौच मनावे।
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