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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 66
नृणामकृतचूडानां विशुद्धिर्नैशिकी स्मृता । निर्वृत्तमुण्डकानां तु त्रिरात्राच्छुद्धिरिष्यते ।।
चूडाकरण संस्कार से पहले बालक के मरने पर एक दिन में और चूड़ाकरण संस्कार के बाद तथा उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार करने के पहले बालक के मरने पर तीन दिन में सपिण्डों की शुद्धि होती है।
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