चूडाकरण संस्कार से पहले बालक के मरने पर एक दिन में और चूड़ाकरण संस्कार के बाद तथा उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार करने के पहले बालक के मरने पर तीन दिन में सपिण्डों की शुद्धि होती है।
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