रात्रिभिर्मासतुल्याभिर्गर्भस्त्रावे विशुध्यति ।
रजस्युपरते साध्वी स्नानेन स्त्री रजस्वला ।।
तीन मास से लेकर छ: मास तक जितने मास का गर्भ गिरा हो, उतने दिनों में माता शुद्ध होती है तथा साध्वी रजस्वला स्त्री रज के निवृत्त होने पर स्नान से (पाँचवें दिन) शुद्ध (यज्ञ-देवपूजन में भाग लेने योग्य) होती है।
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