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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 63
अल्ला चैकेन रात्र्या च त्रिरात्रैरेव च त्रिभिः । शवस्पृशो विशुध्यन्ति त्र्यहादुदकदायिनः ।।
शव का स्पर्श करने वाले सपिण्ड दस दिन में शुद्ध होते हैं तथा समानोदक तीन दिन में शुद्ध होते हैं।
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