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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 62
निरस्य तु पुमाञ्छुक्रमुपस्पृश्यैव शुध्यति । वैजिकादभिसम्बन्धादनुरुन्ध्यादघं त्र्यहम्‌ ।।
मनुष्य (ज्ञानपूर्वक) वीर्यपात कर स्नान करके ही शुद्ध होता है तथा पर स्त्री में बैजिक सम्बन्ध होने पर तीन दिन अशुद्धि मनानी चाहिये।
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