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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 60
सपिण्डता तु पुरुषे सप्तमे विनिवर्तते । समानोदक भावस्तु जन्मनाम्नोरवेदने ।।
सपिण्डता सातवीं पीढ़ी में निवृत्त हो जाती है और समानोदकता जन्म तथा नाम के न जानने पर निवृत्त हो जाती है।
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