दन्तजातेऽनुजाते च कृतचूडे च संस्थिते ।
अशुद्धा बान्धवाः सर्वे सूतके च तथोच्यते ।।
(बच्चों के) दाँत पैदा होने पर या शीघ्र पैदा होने वाला हो तब, चूडाकरण और यज्ञोपवीत संस्कार करने पर, मरने से सभी बान्धवों (सपिण्ड तथा समानोदक वालों) को सूतक (बच्चे के पैदा होने से सूतक) के समान अशौच होता है।
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