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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 53
वर्षे वर्षेऽश्वमेधेन यो यजेत शतं समाः । मांसानि च न खादेद्यस्तयोः पुण्यफलं समम्‌ ।।
जो प्रतिवर्ष अश्वमेध यज्ञ सौ वर्ष तक करे तथा जो मांस नहीं खावे; उन दोनों का पुण्यफल (स्वर्गादि लाभ) बराबर है।
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