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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 50
न भक्षयति यो मांसं विधि हित्वा पिशाचवत्‌ । स लोके प्रियतां याति व्याधिभिश्च न पीड्यते ।।
जो पिशाच के समान, शास्त्रोक्त विधि-विहित भी मांस-भक्षण का त्याग करता है, वह लोगों का प्रिय बनता है तथा रोगों से पीड़ित नहीं होता।
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