यब्छ्यायति यत्कुरुते रतिं बध्नाति यत्र च ।
तदवाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ।।
जो किसी को हिंसा नहीं करता; वह जिसका चिन्तन करता है, जो कार्य करता है और जो (परमात्मचिन्तन आदि) में ध्यान लगाता है; उन सबों को बिना (विशेष प्रयत्न के ही प्राप्त करता है)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।