यो बन्धनवधक्लेशान् प्राणिनां न चिकीर्षति ।
स सर्वस्य हितप्रेप्सुः सुखमत्यन्तमश्नुते ।।
जो जीवों का वध तथा बन्धन नहीं करना चाहता है, वह सबका हिताभिलाषी अत्यन्त सुख प्राप्त करता है।
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