गृहे गुरावरण्ये वा निवसन्नात्मवान्द्रिजः ।
नावेदविहितां हिंसामापद्यपि समाचरेत् ।।
गृहस्थाश्रम, ब्रह्मचर्याश्रम या वानप्रस्थाश्रम में रहता हुआ जितेन्द्रिय द्विज वेदविरुद्ध हिंसा को आपत्ति में भी न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।