मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 40
ओषध्यः पशवो वृक्षास्तिर्यञ्जः पक्षिणस्तथा । यज्ञार्थं निधनं प्राप्ताः प्राप्नुवन्त्युच्छितीः पुनः ।।
यज्ञ के लिए नाश (मृत्यु) को प्राप्त औषधियाँ (ब्रीहि आदि), पशु (छाग आदि), वृक्ष (यज्ञस्तम्भ के लिये खदिरादि), तिर्यक्‌ (कच्छप आदि) और पक्षी (कपिञ्जल आदि) फिर (जन्मान्तर में) उत्तम योनि को प्राप्त करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें