यज्ञ के लिए नाश (मृत्यु) को प्राप्त औषधियाँ (ब्रीहि आदि), पशु (छाग आदि), वृक्ष (यज्ञस्तम्भ के लिये खदिरादि), तिर्यक् (कच्छप आदि) और पक्षी (कपिञ्जल आदि) फिर (जन्मान्तर में) उत्तम योनि को प्राप्त करते हैं।
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