ब्रह्मा ने यज्ञ के लिये पशुओं को स्वयं बनाया है और यज्ञ सम्पूर्ण संसार की उन्नति के लिये है; इस कारण यज्ञ में पशु का वध (वधजन्य दोष न होने से) वध नहीं माना गया है।
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