क्रीत्वा स्वयं वाऽप्युत्पाद्य परोपकृतमेव वा ।
देवान्ितृंश्चार्चयित्वा खादन्मांसं न दुष्यति ।।
खरीदकर, स्वयं मारकर या किसी के द्वारा दिये हुए मांस को देवता तथा पितरों के लिए समर्पण कर खाने वाला दोषी नहीं होता है।
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