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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 29
चराणामन्नमचरा दंष्ट्रिणामप्यदष्ट्रिणः । अहस्ताश्च सहस्तानां शूराणां चैव भीरवः ।।
चर (चलने-फिरने वाले मृगादि) जीवों के अचर (नहीं चलने-फिरने वाले-तृण, लता आदि); दाँतवाले (व्याघ्र सिंह आदि) जीवों के बिना दाँतवाले (हरिण आदि) जीव, हाथ सहित (मनुष्य आदि) जीवों के विना हाथ वाले (मछली, पशु, पक्षी आदि) जीव और शूरवीर (व्याघ्र, सिंह आदि) जीवों के भीरु (डरने वाले - हाथी, मृग आदि) जीव खाद्य (भक्ष्य) हैं।
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