मन्त्र द्वारा प्रोक्षण संस्कार से युक्त यज्ञ में हवन किया गया मृगादि पशु का मांस, ब्राह्मणों की इच्छा से हो तब (एक ही बार, दुबारा नहीं), शास्त्रोक्त विधि के अनुसार मधुपर्क तथा श्राद्ध में नियुक्त होने पर और प्राण-सङ्कट (अन्य खाद्य के अभाव या रोग-विशेष के) होने पर मांस को अवश्य खाना चाहिये।
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