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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 26
एतदुक्तं द्विजातीनां भक्ष्याभक्ष्यमशेषतः । मांसस्यातः प्रवक्ष्यामि विधिं भक्षणवर्जने ।।
(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि) द्विजो के सम्पूर्ण भक्ष्य और अभक्ष्यो को यह (मैंने) कह दिया, अब मांस के खाने और न खाने की विधि को कहुँगा।
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