बभूवुर्हि पुरोडाशा भक्ष्याणां मृगपक्षिणाम् ।
पुराणेष्वृषियज्ञेषु ब्रहमक्षत्रसवेषु च ।।
क्योंकि पहले भी मुनियों तथा ब्राह्मण-क्षत्रियों के यज्ञो में (शास्त्रानुसार) भक्ष्य पशु-पक्षियों का पुरोड़ाश (हविष्य-हव्य) बना था, (अतः शास्र-विहित पशु-पक्षियों का वध यज्ञ के लिये करना चाहिये)।
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