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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 2
एवं यथोक्त विप्राणां स्वधर्ममनुतिष्ठताम्‌ । कथं मृत्युः प्रभवति वेदशास्त्रविदां प्रभो ।।
हे प्रभो! इस प्रकार यथायोग्य कहे गये तथा वेदशास्तरज्ञाता अपने धर्म का आचरण करते हुए ब्राह्मणों की मृत्यु कैसे होती है?
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