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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 19
छत्राकं विड्वराहं च लशुनं ग्रामकुक्कुटम्‌ । पलाण्डुं गृञ्जनं चैव मत्या जग्ध्वा पतेद्‌ द्विजः ।।
छत्राक (कवक-भूकन्धविशेष), ग्राम्य सूकर, लहसुन, ग्राम्य मुर्गा, प्याज और गृञ्जन (लाल मूली या सलगम, किसी-किसी के मत से गाजर) को बुद्धिपूर्वक खाने से द्विज पतित होता है (बुद्धिपूर्वक या अभ्यासपूर्वक इनको खाने वाले द्विज पतित, प्रायाश्चित्त को करें)।
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