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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 17
न भक्षयेदेकचरानज्ञातांश्च मृगद्विजान्‌ । भ्रक्ष्येष्वपि समुद्दिष्टान्‌ सर्वान्‌ पञ्चनखांस्तथा ।।
अकेले विचरने वाले (साँप आदि), नाम तथा जाति में विशेषत: अज्ञात मृग तथा पक्षी और भक्ष्यो में कहे गये भी (विशेष निषेध के विना सामान्यत: कहे गये भी) पञ्चनख (पाँच नखवाले) प्राणी (यथा - वानर, लंगूर आदि) को नहीं खावें।
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