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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 167
भायायै पूर्वमारिण्यै दत्वाऽ ग्नीनन्त्यकर्मणि । पुनदरिक्रियां कुर्यात्पुनराधानमेव च ।।
पहले मरी हुई स्त्री का दाहकर्म आदि अन्त्येष्टि संस्कार करके गृहस्थाश्रम को चाहने वाला (सपुत्र या अपुत्र) द्विजाति फिर विवाह करे अथवा श्रौताग्नि का आधान करे।
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