एवं वृत्तां सवर्णा स्त्री द्विजातिः पूर्वमारिणीम् ।
दाहयेदग्निहोत्रेण यज्ञपात्रैश्च धर्मवित् ।।
ऐसे (५।१४४-१६४) आचरण वाली पहले मरी हुई सवर्णा स्त्री को दाहक्रिया धर्मज्ञ द्विजाति अग्निहोत्र की अग्नि तथा यज्ञपात्रों से विधिवत् करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।