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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 166
एवं वृत्तां सवर्णा स्त्री द्विजातिः पूर्वमारिणीम्‌ । दाहयेदग्निहोत्रेण यज्ञपात्रैश्च धर्मवित्‌ ।।
ऐसे (५।१४४-१६४) आचरण वाली पहले मरी हुई सवर्णा स्त्री को दाहक्रिया धर्मज्ञ द्विजाति अग्निहोत्र की अग्नि तथा यज्ञपात्रों से विधिवत्‌ करे।
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