मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 165
अनेन नारी वृत्तेन मनोवाग्देहसंयता । इहाग्र्यां कीर्तिमाप्नोति पतिलोकं परत्र च ।।
मन-वचन-कार्य से संयत स्त्री इस (५।१४४-१६३) स्त्री-व्यवहार (पति-शुश्रूषा आदि) से इस लोक में उत्तम यश को और परलोक में पति के साथ अर्जित स्वर्ग आदि शुभ लोकों को प्राप्त करती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें