मन-वचन-कार्य से संयत स्त्री इस (५।१४४-१६३) स्त्री-व्यवहार (पति-शुश्रूषा आदि) से इस लोक में उत्तम यश को और परलोक में पति के साथ अर्जित स्वर्ग आदि शुभ लोकों को प्राप्त करती है।
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