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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 160
अपत्यलोभाद्या तु स्त्री भर्तारमतिवर्तते । सेह निन्दामवाप्नोति परलोकाच्च हीयते ।।
सन्तान के लोभ से जो स्त्री पति का उल्लङ्घन (व्यभिचार) करती है, वह इस लोक में निन्दा को प्राप्त करती है और उस पुत्र के द्वारा स्वर्ग से भी भ्रष्ट होती है।
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