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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 158
अनेकानि सहस्राणि कुमारब्रह्मचारिणाम्‌ । दिवंगतानि विप्राणामकृत्वा कुलसन्ततिम्‌ ।।
बाल्यावस्था से ही ब्रह्मचर्य पालने वाले (सनक, बालखिल्य आदि) अनेकों सहस्र ब्राह्मण वंशवृद्धि के लिये संतानोत्पत्त को बिना किये ही स्वर्ग गये हैं।
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