पति के मर जाने पर (जीविका रहने पर भी) पवित्र (सात्विक गुणयुक्त) पुष्प, कन्द और फल (के आहार) से शरीर को क्षीण करे (व्यभिचार की भावना से दूसरे पुरुष का) नाम भी न ले।
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