पाणिग्राहस्य साध्वी स्त्री जीवतो वा मृतस्य वा ।
पतिलोकमभीप्सन्ती नाचरेत्किचिदप्रियम् ।।
पतिलोक को चाहने वाली पतिव्रता स्त्री जीवित या मृत पति का अप्रिय कोई कार्य (व्यभिचार से या शास्त्रोक्त श्राद्धादि के त्याग से) न करे।
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