मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 154
नास्ति स्त्रीणां पृथग्यज्ञो न व्रतं नाप्युपोषितम्‌ । पतिं शुश्रूषते येन तेन स्वर्गे महीयते ।।
स्त्रियो के लिये पृथक्‌ (पति के बिना) यज्ञ नहीं है, और (पति की आज्ञा के बिना) व्रत तथा उपवास नहीं है; पति की सेवा से ही स्त्री स्वर्गलोक में पूजित होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें