स्त्रियो के लिये पृथक् (पति के बिना) यज्ञ नहीं है, और (पति की आज्ञा के बिना) व्रत तथा उपवास नहीं है; पति की सेवा से ही स्त्री स्वर्गलोक में पूजित होती है।
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