यो यस्य मांसमश्चाति स तन्मांसाद उच्यते ।
मत्स्यादः सर्वमांसादस्तस्मान्मत्स्यान् विवर्जयेत् ।।
जो जिसके मांस को भक्षण करता है, वह उसका "मांसाद” कहा जाता है और मछली के माँस को भक्षण करने वाला “सर्वमाँसाद" (सबके माँस का भक्षण करने वाला) कहा जाता है, इस कारण से मछली (के माँस) को छोड़ दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।