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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 149
सदा प्रहृष्टया भाव्यं गृहकार्ये च दक्षया । सुसंस्कृतोपस्करया व्यये चामुक्तहस्तया ।।
स्त्री को सर्वदा (पति आदि के रोष में भी) प्रसन्न, गृह-कार्यो में चतुर, घर के बर्तन आदि को शुद्ध एवं स्वच्छ रखने वाली और अधिक व्यय नहीं करने वाली (अपने अभिभावक की आय के अनुसार कुछ धन बचाते हुए व्यय करने वाली) होना चाहिये।
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